pamphlet
स्वतंत्र भारत का उत्तरदायित्व
आर्थिक प्रजातंत्र के पक्ष से तर्क
1956
6 pages
Summary
यह हिंदी pamphlet, जिसका शीर्षक ‘स्वतंत्र भारत का उत्तरदायित्व’ और उपशीर्षक ‘आर्थिक प्रजातंत्र के पक्ष से तर्क’ है, एम. आर. मसानी का 1956 में प्रकाशित आर्थिक-राजनीतिक तर्क प्रस्तुत करता है। इन छह rendered pages में मसानी स्वतंत्र भारत के सामने मौजूद मिश्रित अर्थव्यवस्था, राज्य-नियंत्रण और समाजवाद की दिशा पर आलोचनात्मक विचार करते हैं। उनका आग्रह है कि लोकतंत्र को केवल राजनीतिक संस्थाओं तक सीमित न रखकर आर्थिक स्वतंत्रता, निजी संपत्ति, स्वतंत्र उद्यम और व्यक्ति के अधिकारों से जोड़ा जाना चाहिए।
पाठ में भारी उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र, लाइसेंस और नियोजन के विस्तार को लेकर आशंका व्यक्त की गई है। मसानी के अनुसार अत्यधिक सरकारी नियंत्रण उत्पादन, उपभोक्ता-हित और उद्यमशीलता को बाधित करता है तथा प्रशासनिक शक्ति के केंद्रीकरण से स्वतंत्रता कमजोर होती है। वे किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हितों को बाजार-आधारित व्यवस्था, संपत्ति-अधिकार और सीमित शासन के साथ जोड़ते हैं। अंतिम पृष्ठ पर पाठ को 27 सितंबर 1956 के Times of India से पुनर्मुद्रित बताया गया है।
Key points
- मसानी स्वतंत्रता को राजनीतिक अधिकारों के साथ आर्थिक स्वतंत्रता से भी जोड़ते हैं।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था और बढ़ते राज्य-नियंत्रण की आलोचना की गई है।
- नियोजन, सार्वजनिक क्षेत्र और औद्योगिक नियंत्रण को उत्पादन तथा उपभोक्ता-हित के लिए बाधक बताया गया है।
- पाठ निजी संपत्ति, स्वतंत्र उद्यम और बाजार-आधारित विनिमय का बचाव करता है।
- अत्यधिक प्रशासनिक शक्ति को व्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व के लिए जोखिम माना गया है।
- किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के हितों को आर्थिक विकेंद्रीकरण से जोड़ा गया है।
- समाजवाद और साम्यवाद के बीच भेद करते हुए लोकतांत्रिक समाजवाद की आर्थिक दिशा पर प्रश्न उठाए गए हैं।
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